पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीय संबंध
समाचार में
- भारत–न्यूज़ीलैंड सामरिक साझेदारी की घोषणा ऑकलैंड में की गई तथा दोनों देशों ने आगामी वर्षों में द्विपक्षीय सहयोग को अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए “वर्ष 2030 तक की रूपरेखा” को एक मार्गदर्शक ढाँचे के रूप में अपनाया।
पृष्ठभूमि
- भारत और न्यूज़ीलैंड ने वर्ष 1952 में राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। दोनों देशों के संबंध लोकतंत्र, राष्ट्रमंडल की सदस्यता, समान विधिक परंपराओं तथा समावेशी आर्थिक विकास जैसे साझा मूल्यों पर आधारित हैं।
- न्यूज़ीलैंड ने भारत के बढ़ते वैश्विक महत्व को स्वीकार करते हुए उसे एक प्राथमिकता प्राप्त साझेदार के रूप में मान्यता दी है।
- इस उद्देश्य से 2011 की ‘ओपनिंग डोर्स टू इंडिया’ नीति, NZ Inc. की भारत रणनीति तथा 2020 की ‘भारत-न्यूज़ीलैंड 2025: संबंधों में निवेश’ रणनीति जैसी पहलों को अपनाया गया, जिनका उद्देश्य दोनों देशों के बीच सामरिक, आर्थिक, व्यापारिक एवं राजनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ बनाना है।
नवीनतम प्रगति : वर्ष 2030 तक की रूपरेखा
- राजनीतिक एवं राजनयिक सहभागिता: भारत और न्यूज़ीलैंड नियमित उच्चस्तरीय संवाद के माध्यम से अपने राजनीतिक एवं राजनयिक संबंधों को अधिक सुदृढ़ करेंगे।
- इसके अंतर्गत दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों, मंत्रिमंडल के सदस्यों तथा विदेश मंत्रियों के नियमित पारस्परिक दौरे शामिल होंगे।
- दोनों देश भारत–न्यूज़ीलैंड सामरिक साझेदारी तथा वर्ष 2030 तक की रूपरेखा के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा, समन्वय एवं निगरानी हेतु वरिष्ठ अधिकारियों की वार्षिक बैठक आयोजित करेंगे।
- रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग दोनों देश नियमित सैन्य अभ्यास, रक्षा कर्मियों के आदान-प्रदान, रक्षा संवाद तथा 2025 के रक्षा सहयोग समझौता ज्ञापन (MoU) के प्रभावी कार्यान्वयन के माध्यम से रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करेंगे।
- व्यापार एवं आर्थिक सहयोग: दोनों देशों का लक्ष्य वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 7 अरब न्यूज़ीलैंड डॉलर (लगभग ₹35,000 करोड़) तक पहुँचाना है।
- इसके लिए भारत–न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को आगे बढ़ाने तथा पारस्परिक मान्यता व्यवस्था के माध्यम से सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर बल दिया जाएगा।
- इसके अतिरिक्त, बागवानी, वानिकी, पशुपालन तथा डेयरी क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान, तकनीकी आदान-प्रदान एवं नीतिगत सहयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा।
- जन-संपर्क, संस्कृति एवं खेल: भारत और न्यूज़ीलैंड प्रवासी भारतीय समुदाय के साथ सहभागिता बढ़ाकर जन-से-जन संपर्क को सुदृढ़ करेंगे।
- दोनों देश खेल सहयोग का विस्तार करेंगे, पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में आदान-प्रदान को बढ़ावा देंगे तथा समुद्री क्षेत्र में सहयोग को गहरा करेंगे।
- इसमें नाविकों की दक्षता प्रमाण-पत्रों की पारस्परिक मान्यता तथा समुद्री विरासत के संरक्षण में सहयोग भी शामिल होगा।
- शिक्षा, अनुसंधान, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा आपदा प्रबंधन: दोनों देश 2025 शिक्षा सहयोग व्यवस्था के कार्यान्वयन तथा शैक्षणिक संस्थानों के बीच साझेदारी का विस्तार कर शिक्षा क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देंगे।
- वे अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन एवं वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन के माध्यम से जलवायु कार्रवाई एवं नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग करेंगे।
- साथ ही कृषि, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल परिवर्तन तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान, नवाचार एवं तकनीकी सहयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा।
- क्षेत्रीय एवं बहुपक्षीय सहयोग: भारत और न्यूज़ीलैंड आसियान आधारित तंत्रों तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में क्षेत्रीय एवं बहुपक्षीय सहयोग को अधिक सुदृढ़ करेंगे।
- दोनों देश संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून अभिसमय (UNCLOS) के अनुरूप नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था तथा विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करेंगे।
- संयुक्त राष्ट्र में सहयोग को सुदृढ़ करते हुए दोनों देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों का समर्थन करेंगे, जिसमें भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन भी शामिल है।
- जहाँ संभव होगा, दोनों देश अंतरराष्ट्रीय संगठनों में एक-दूसरे की उम्मीदवारी का पारस्परिक समर्थन करेंगे।
महत्व
- भारत–न्यूज़ीलैंड सामरिक साझेदारी, भारत के लिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उसकी सामरिक उपस्थिति को सुदृढ़ करने तथा समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- यह व्यापार, निवेश, कृषि, शिक्षा, पर्यटन तथा प्रौद्योगिकी सहयोग को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), फिनटेक, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना एवं अग्रणी प्रौद्योगिकियों में सहयोग का विस्तार करेगी।
- यह रक्षा सहयोग को सुदृढ़ करने, छात्र एवं शैक्षणिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहन देने तथा न्यूज़ीलैंड में भारतीय प्रवासी समुदाय के साथ संबंधों को अधिक सुदृढ़ बनाने में सहायक होगी।
- इसके अतिरिक्त, यह संयुक्त राष्ट्र सुधारों, जलवायु कार्रवाई, सतत विकास तथा नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था पर दोनों देशों के बीच समन्वय को भी सुदृढ़ करेगी।
चुनौतियाँ एवं चिंताएँ
- कृषि संबंधी संवेदनशीलताएँ: भारत द्वारा अपने छोटे डेयरी किसानों के हितों की सुरक्षा की नीति, न्यूज़ीलैंड के डेयरी हितों के साथ टकराव के कारण ऐतिहासिक रूप से व्यापार वार्ताओं में प्रमुख बाधा रही है।
- सुरक्षा एवं उग्रवाद संबंधी चुनौतियाँ: सीमा-पार अपराधों तथा न्यूज़ीलैंड की भूमि पर सक्रिय खालिस्तान समर्थक उग्रवादी समूहों की गतिविधियों का प्रभावी प्रबंधन एक संवेदनशील विषय है, जिसके लिए संतुलित एवं विवेकपूर्ण कूटनीतिक सहयोग आवश्यक है।
- संपर्क एवं परिवहन संबंधी चुनौतियाँ: वर्तमान में दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष वाणिज्यिक उड़ानों का अभाव पर्यटन, व्यापारिक आवागमन तथा आपूर्ति शृंखला के त्वरित विकास में बाधा उत्पन्न करता है।
- इसके अतिरिक्त, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती भूराजनैतिक अनिश्चितताएँ भी इस साझेदारी के पूर्ण विस्तार को सीमित करती हैं।
निष्कर्ष एवं आगे की राह
- भारत और न्यूज़ीलैंड वर्ष 2030 तक की रूपरेखा को समयबद्ध कार्ययोजनाओं के माध्यम से प्रभावी ढंग से लागू कर सकते हैं तथा व्यापार एवं निवेश में वृद्धि करके वर्ष 2030 के व्यापार लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।
- दोनों देशों को लचीली एवं सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), स्वच्छ ऊर्जा, अंतरिक्ष एवं डिजिटल प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए।
- शिक्षा एवं अनुसंधान साझेदारी का विस्तार करने, जलवायु अनुकूलन क्षमता तथा नीली अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता है।
- साथ ही, निजी क्षेत्र एवं स्टार्टअप्स की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करते हुए न्यूज़ीलैंड में भारतीय प्रवासी समुदाय की क्षमता का उपयोग व्यापार, नवाचार तथा जन-से-जन संबंधों को अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए किया जाना चाहिए।
Source :PIB
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